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Lakshya Movie Review In Hindi : जानिए आखिर क्या है फिल्म की कहानी

Lakshya Movie Review In Hindi : साउथ की स्पोर्ट ड्रामा फिल्म लक्ष्य आज स्वदेशी प्लेटफॉर्म aha पर रिलीज़ हो चुकी है जिसमे साउथ के जानेमाने अभिनेता नागा शौर्य मुख्य किरदार मे है | फिल्म का निर्देशनकार्य धीरेंद्र संतोष जगरलापुडी द्वारा किया है और इस फिल्म का निर्माण नारायण दास नारंग, राम मोहन राव और शरथ मरारी ने साथ मिलकर किया है | फिल्म मे नागा शौर्य के अलावा जगपति बाबू, केतिका शर्मा और सचिन खेडेकर भी अहम किरदारों मे है |

Lakshya Movie Review In Hindi

लक्ष्य की कहानी परधू (नागा शौर्य) की है जो बचपन से ही एक प्रतिभाशील तीरंदाज है , परधू की प्रतिभा को देखते हुए उसके दादा (सचिन खेडेकर) अपनी कमाई का पूरा हिस्सा लगाकर परधू को हैदराबाद की सबसे बड़ी तिरंदाज अकेडमी मे उसका दाखिला करा देते है जिसके बाद परधू अपनी मेहनत की दम पे दादा की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए बहुत जल्द स्टेट चैंपियन बन जाता है लेकिन उसकी लाइफ मे सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आता है जब अचानक से उसके दादा की मौत हो जाती है और वो इस दुख से निकलने के लिए ड्रगस लेना शुरू करता है और धीरे धीरे उसे इस ड्रग की लत लग जाती है जिसके बाद वो अपने ही हाथो अपने करियर को खत्म कर लेता है | आगे की कहानी मे आपको ये देखना है की परधु अपनी जिंदगी वापिस कैसे लौटता है और वो विश्व चैंपियन कैसे बनता है |


Lakshya Movie Review In Hindi


फिल्म की कहानी दमदार है लेकिन इसमे नया कुछ नही देखने मिलता हालाँकि नागा शौर्य ने परधू की भूमिका मे बेहतरीन प्रदर्शन किया है जो की बहुत ही सराहनीय है पूरी फिल्म इन्ही के कंधो पर टिकी रहती है इसके अलावा केतिका शर्मा ने भी परधू की प्रेमिका के रूप मे कमाल की लगती है और पूरी फिल्म मे उनके चेहरे के भाव देखने लायक होते है फिल्म का फर्स्ट हॉफ बहुत तेजी से चलता है लेकिन सेकंड हॉफ से फिल्म की रफ्तार धीमी होने लगती है जो फिल्म को उबाऊ बनाती है लेकिन फिर भी अगर आप स्पोर्ट प्रेमी की गिनती मे आते है तो आपको इसका सेकंड हॉफ बिल्कुल भी उबाऊ महसूस नही होगा और आप पूरी फिल्म को आसानी से देख जाओगे काला भैरव का संगीत ज्यादा मधुर तो नही लेकिन बीजीएम की बात करे तो वो कानों को सुकून जरूर देता है | अगर एक लाइन मे कहे तो पहले हॉफ मे फिल्म आपको बिल्कुल भी बोरिंग नही लगती लेकिन सेकंड हॉफ मे कुछ जबरन सीन और बिना मतलब के डायलॉग्स के कारण फिल्म सुस्त लगने लगती है जिसका एक और सबसे बड़ा कारण सेकंड हॉफ मे इमोशन की कमी को माना जा सकता है | कुल मिलाकर बात करे तो फिल्म को टाइम पास के लिए एक बार जरूर देखना चाहिए |


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