Khakee The Bihar Chapter Review In Hindi : कुछ खास असर नही छोड़ सकी नीरज पांडे की डेव्यू सीरीज।

Khakee The Bihar Chapter : जब क्राइम पर आधारित फिल्म या वेबसीरीज बनाना हो तो ज्यादातर उत्तरप्रदेश और बिहार मे होने वाले अपराध और अपराधियों की कहानीया

Khakee The Bihar Chapter : कुछ खास असर नही छोड़ सकी नीरज पांडे की डेव्यू सीरीज। 


Khakee The Bihar Chapter Review


Khakee The Bihar Chapter : जब क्राइम पर आधारित फिल्म या वेबसीरीज बनाना हो तो ज्यादातर उत्तरप्रदेश और बिहार मे होने वाले अपराध और अपराधियों की कहानीया मेकर्स को हमेशा से लुभाती आ रही है और अब इसका असर ओटीटी पर भी पड़ा है। प्राइम वीडियो की 'मिर्जापुर' वेबसीरीज के बाद अब नेटफ्लिक्स ने भी 'खाकी : द बिहार चैप्टर' वेबसीरीज से अपने कदम बिहार की अपराधिक घटनाओ पर रख दिये है जी है दोस्तों नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई 'खाकी' एक क्राइम ड्रामा वेबसीरीज है जिसमे खाकी पहनने वाले पुलिस अफसर और गुंडइयो के बीच होने वाली काटे की टक्कर को दिखाया गया है। इस सीरीज मे आपको आशुतोष राणा, अविनाश तिवारी, रवि किशन और करण टैकर मुख्य भूमिकाओ मे दिखाई देंगे। बता दे की इस सीरीज के क्रिएटर नीरज पांडे है जो इससे पहले 'बेबी' और नाम शबाना जैसी फिल्में बॉलीवुड को दे चुके है। 


Khakee Webseries Story In Hindi (खाकी वेबसीरीज की कहानी) 


सीरीज की कहानी सच्ची घटनाओ से प्रेरित है जो बिहार राज्य के पुलिस विभाग और वहाँ पर एक्टिव रहे बाहुबलियों को केंद्र मे रखकर लिखी गई है। वेब सीरीज मे दिखाया जाता है की एक जाबांज पुलिस अफसर ट्रांसफर के बाद बिहार के एक छोटे से गांव शेखपुरा की छोटी सी पुलिस चौकी मे आता है जहाँ उसे एक खूॅखार क्रिमिनल चंदन मतो के बारे मे पता चलता है जिसने पूरे शेखपुरा मे आतंक का माहौल बना रखा है। इस गुंडे से शेखपुरा को आजाद कराने के लिए पुलिस वहा की जनता को अश्वासन दिलाती है की 15 अगस्त से पहले वो चंदन मतो को पकड़ लेगी लेकिन पुलिस के लिए ऐसा करना बिल्कुल भी आसान नही होता क्योंकि पुलिस टीम की तरह चंदन के पास भी एक ताकतवर टीम है जिसे हराना सबके बस की बात नही है अब पुलिस चंदन मतो को कैसे पकड़ेगी और कहानी मे कौन कौन से मोड आते है ये सब आपको सीरीज मे देखना होगा। 


Khakee Webseries Review (खाकी वेबसीरीज रिव्यू) 


खाकी एक एक्शन पैक्ड क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज है जिसमे आपको ढेर सारे ट्विस्ट देखने मिलेंगे। लेकिन कहानी उतनी मजबूत नही है जितनी ट्रेलर को देखने पर लग रही थी शुरुआत से लेकर आखिरी एपिसोड तक केवल चोर पुलिस के बीच चूहे बिल्ली का खेल देखने मिलता है। मिर्जापुर से इसकी तुलना करे तो मिर्जापुर से यह कई गुना फीकी लगती है। सीरीज मे सस्पेंस है लेकिन जिस तरीके से सीरीज की पटकथा लिखी गई है वो आपको डिसअपॉइंट् करेगी। बैक ग्राउंड म्युज़िक, डायलॉग और भी काफी भद्दे किस्म के लगते है। इन सबके अलावा सीरीज की कास्टिंग इसकी सबसे मजबूत कड़ी है जिसमे आशुतोष राणा का बड़े पुलिस अधिकारी का रोल हो या करण टैकर का रोल हो सभी के किरदार आपको काफी दिलचस्प लगने वाले है। अविनाश तिवारी भी अपने रोल मे खूब जमते है। कम शब्दो मे कहे तो यह एक एवरेज टाइम पास सीरीज है जिसे आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते है।